Thursday, 18 July 2013

ग़लतफहमी की ग़लती....!!!

आँसू आ जाते है आँखो मे रोने से पहले....
जब ख्वाब टूटते है नींद आने से पहले.....
किसिपे बिना जाने शक करना ग़लती है ये समजा है मैने....
काश कोई रोक लेता मूज़े ये ग़लतफहमी की ग़लती करने से पहले......



छोटी सी ग़लतफहमी कर देती है जुड़ा हम को.........
हालत नही बदलगे मालूम ना था हम को.......

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रिस्तो की इतनी पहेचन ना थी हम को....
क्या रिश्ता मेरा तुम्हारा इतना कमज़ोर था...?


जिसे चाहा ज़िंगी भर उसे छोड़ दिया पल भर मैं......
जो एक पल के लिए भी हम से दूर ना हुआ करते थे..........
आज दूर जाना पड़ा उससे ज़िंदगी भर के लिए............


कभी हम खुद फुलो को लेकर रस्तो पे बिखेरा करते थे......
आज लगता है खुद रस्तो के पॅट्त ने  काँटे बिखेरे हमारे  लिए......
.........!!!!


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