Sunday, 15 September 2013

जब जब टूटे ख्वाब..!!!

ज़िंदगी का हर ख्वाब पूरा नही होता ...... होता अगर तो हर  शख्स अधूरा नही होता.......खवाब देखने की जब आदत हो जाती है हक़ीक़त बेरंग नज़र आती है क्यू की हमारे ख्वाब की दुनिया बेहद रंगीन होती है....इतने सारा रंग खुदा ने इस हक़ीकत के जहाँ मे बनाए ही कहाँ...ख्वाब देखते देखते  कभी हम टूटे तो कभी ख्वाब टूटे... नज़ाने कोई कितने टुकड़ो मे अरमान टूटे.....हर टुकड़ा आईना है हमारी ज़िंदगी का..... हर आईने के साथ लखो जज़्बात टूटे....!!!!
                                       
            जो देखे ख्वाब कुछ पूरे हो गये ओर कुच्छ अधूरे रह गये......हर किसी की ज़िंदगी की यही रीत है..कभी पाना है कभी खोना है .........इतने सारे ख्वाब देखे है इन आँखो ने की अब इस आँखो मे और कुच्छ समा ही नही सकता...उस सुबह की राह मे बिछाई है आँखे की जिस दिन पूरे होने वाले है ख़्वाब पर ये सूरज हर रोज़ उस सुबह को ला भी तो नही पा रहा है.....आ दिल तू इतने भी ख्वाब मत दिखा की उसके बॉज़ तले मे डूब जौ ओर हर शक्ष तो ये बॉज़ उठा भी नही सकता..

         "ख्वाब बनकर जो यादे पॅल्को  मे बस्ती है वो कभी आँखो से मोटी बन कर टूट भी जाती है....ओर फिर धुंधले रास्ते ओर  मंज़िल अंजानी..... फिर भी रुकते कदम आगे बढ़ते जा रहे है...कभी कभी तो ना मिलती है मंज़िल ओर ना उन रहो पे कोई साथी  हम उन ही रहो पे भटकते रह जाते है...लगता है जैसे ना मिली जीत हमे ओर नही हरी है बाज़ी हमने ऐसे ही किस्मत से लड़ते रह जाते है हम.........वक़्त आने पर हसना ओर रोना है...वैसे तो इस  वक़्त का भी क्या भरोसा करे जिसे ना किसी का होना है.......जितनी भी कोशिस करो ये पराया था ओर इसे पराया ही रहना है.
            
           जो भी करले चाहे हम तुम मगर......
रात का आना नही बदलेगा....पर हर रत आनेवाला ख्वाब ज़रूर बदलता है
मंज़िल  वही है पर साथ आ रहे लोगो का  करवा ज़रूर बदलता है,
जज़्बा रखो.. हरदम जीने का,
क्यूँ की..
किस्मत बदले ना बदले, वक़्त ज़रूर बदलता है मेरे यारो.....!!!!!
                               

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