Thursday, 9 January 2014

बस अब ओर नही..!!!

कभी चाहत के पर्दे मे नफ़रत भी है मुमकिन....
तो कभी नफ़रत के पर्दे मे चाहत भी तो होगी.....
अगर कोई गुस्सा  होता है आपको अपना समझकर....
तो उसको आपसे मोहब्बत भी होगी......

जिस इंसान आप पे गुस्सा ज़्यादा करता है,......
वो इंसान आप से प्यार भी तो उतना ही ज़्यादा करता है...
वो कहते है ना  Red color Denger को show करता है.......
लेकिन Red color Deep Love को भी show करता है मेरे यारो.!!!!

वैसे भी हम गुस्सा उनपर होते है जिनपे हमे यकीन होता है की वो हमे माना लेंगे ज़रूर…. और हम मानते उसे ही है जिसे हम कभी खोना न्ही चाहते….!!
लेकिन एक कड़वा सच ये भी है गुस्से मे हम अपने काबू मे नही रहते.....काई उल्टे सीधे शब्द मूह से निकल जाते है....शब्द का अपना खुद का संसार है...कोई शब्द मीठे है तो कई कड़वे भी...शब्दो की खूबसूरती उसके उपयोग मे है...कई अच्छे शब्द लगते है जैसे अमृत की बूँद...ओर काई बुरे शब्द लगता है जैसे ज़हेर की घूँट....मूह के पिंजरे से निकल कर वो कभी वापस लोटना जानते ही नही.....कभी कभी हम गुस्से मई इतने बुरे शब्द बोल देते है की बाइ गोद सुन ने वाले इंसान को कौवे की आवाज़ भी पल भर के लिए प्यारी लगे.....!!!!!!
वो कहते है ना..!
हमें तो मोहब्बत के लिए भी जिंदगी कम लगती है,.....
मगर ना जाने लोग नफरत के लिए वक़्त कहाँ से लाते हैं.....  "</3 "

पर मत करो गुस्सा  किसी पर इतना भी...
की वक़्त की फेसले बीतने के बाद आपको भी अफ़सोश होने लगे..
क्या पता कल  आप उन्हे  Miss करें ओर
वो खुद हुमेशा क लिए Miss हो जाए.....!!!!  (' _')

                                  

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